केडीए के भ्रष्टाचार पर, पत्रकार गीता पाल की आपबीती…

मित्रों नमस्कार आप सभी को सूचना देना चाहती हूं की केडीए मैं भ्रष्टाचार चरम पर हो गया है|
मैं आपको बताना चाहती हूं कि जिस मकान में अगर विवाद चल रहा हो तो उसे गिराने के लिए कोर्ट से ऑर्डर लेना पड़ता है, जब तक कोर्ट से ऑर्डर ना मिल जाए उसे नहीं गिरा सकते| मगर उन्हें पता है कि जून में कोर्ट बंद रहती है इसलिए केडीए ने अपना असली चेहरा दिखा दिया| उसने बिना सूचना दिए बिना मेरे उपस्थित हुए हमारे कार्यालय को तोड़ दिया|

क्या यह सही किया.?

मैं आपसे पूछना चाहती हूं क्या यह कानून कहता है कि 80 साल की महिला जिसके नाम मकान है जिसका लड़का जिसकी उम्र अभी 50 साल थी उस मकान के पीछे उसकी हत्या कर दी जाती है| मां अपनी जान बचाकर के किराए पर रह रही है उसके साथ इतना बड़ा शोषण करते केडीए को शर्म भी नहीं लगती| जिसका केस कोर्ट में चल रहा है उसको गिराने का अधिकार ही नहीं होता है कि आप उस मकान को गिराने का सोच भी सके, मगर इन्होंने सोच क्या कर दिखाया| इससे लगता है कि भ्रष्टाचार भा०ज०पा० में ऐसे लोग बदनाम कर देते हैं ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए| हम सभी पत्रकार भाइयों से कहना चाहेंगे हम सब लोगों को मिलकर केडी के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए|

“जय हिंद”


मंथन

विषय:-पत्रकारों पर बढ़ते हमले

एक समय हुआ करता था जब कलम की धार लोगों में खौफ पैदा करती थी। जो काम अस्त्र शस्त्र नहीं कर पाते थे वो काम कलम कर देती थी। इस देश में महान कलमकार पैदा हुए जिन्होंने गरीबी झेलते हुए सच का साथ नहीं छोड़ा। उन्हें अपने जीवंत कभी भौतिक सुख नहीं मिला पर मरणोपरांत इतिहास में उनका नाम जरूर सुनहरे अक्षरो से लिखा गया।

लोग पत्रकार को समाज का आईना कहते थे समाज में पत्रकार सम्मानित द्रष्टि से देखा जाता था। पर न जाने ऐसा क्या हुआ लोगों में पत्रकारिता की लोकप्रियता का ह्रास होने लगा पत्रकारों पर जगह जगह हिंसक घटनायें होने लगी कहीं किसी पत्रकार को राम रहीम जैसे लोग मरवा दे रहे है तो कहीं कोई पत्रकार जिंदा जला दिया गया।

अभी कल की घटना जिसमे आपसी विवाद जो कोर्ट में रतन ज्योति की संपादक गीता पाल जी के स्वरूप नगर 112/287 के office का चल रहा है अपने को भा०ज०पा० महिला नेत्री बताने वाले के कहने पर केडीए ने एक पार्टी से मिलकर साज़िश के तहत गिरा दिया जबकि पूरे शहर में केडीए के कारनामे चर्चित है ,और पत्रकार देखते रहे| हम जब तक ये सोचते रहेगे, की हमारे ऊपर आयेगी, तब देखेगे, शायद देर हो चुकी होगी|

हाल ही में एक प्रमुख दैनिक अखबार के पत्रकार को उत्तर प्रदेश के बिल्हौर कस्बे में सरेशाम गोलियों से छलनी कर दिया गया और पुलिस प्रशासन ने इस केस में उदासीनता भरा रवैय्या इख़्तियार किया|

कुछ दिनों बाद एक मामला उर्सला अस्पताल में हुआ एक पत्रकार अपनी मां का इलाज उर्सला अस्पताल में करा रहे थे इलाज में कमी को लेकर जब पत्रकार ने शिकायत की तो पूरे अस्पताल कर्मचारियों ने पत्रकार के साथ मारपीट की|

अभी हाल ही में औरया जिले में दो पत्रकारों को बुरी तरह पीटा गया और जब उन्हें कानपुर के कांशीराम अस्पताल में मेडिकल के लिये लाया गया तो डाक्टरों ने मेडिकल करने में आना कानी की आज उन्हीं पत्रकारों को पीटने वाले गुंडे जान से मारने की धमकी दे रहे है।

सबसे वीभत्स घटना कल श्रीनगर में हुई एक वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी जी को आतंकवादियों ने गोली मार दी ।

अब सोचने वाली बात यह है की देश की सरकारें भी पत्रकार के लिये कुछ नहीं सोच रही। अब वक्त आ गया है जब पत्रकारों को भी पूरे देश में एकजुट होकर आंदोलन करना चाहिये और पत्रकार हित के लिये सरकार से कानून बनाने की मांग करनी चाहिये ।

Most writers will say they’re happy to give you a sample, but make certain that it’s an actual, finished

Additionally, in your introduction, do not forget to include your contact information such as e-mail address and www.sfweekly.com contact numbers.

product.

Share This:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *