टैक्नीशियन और डॉक्टर ने मिलकर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट किया तैयार

बहराइच, 28 अगस्त एक ऐसा फर्जीवाड़ा जिसको सुन कर आपके होश उड़ जायेंगे। पैसों के लालचियों ने एक दो नहीं बल्कि सैंकड़ो निर्दोषों को जेल जाने पर मजबूर कर दिया। जी हां ये सनसनीखेज मामला तो वैसे बहराइच जिले का है मगर अब इसकी जांच बस्ती जिले की क्राइम ब्रांच की टीम कर रही है। बहराइच जिले में तैनात एक्सरे टैक्नीशियन और डॉक्टर ने मिलकर कई फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार की और उन निर्दोषों को जेल भिजवा दिया जिस जुर्म को उन लोगो ने किया ही नहीं था।

एक आरटीआई से खुलासे के बाद इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। आरटीआई में मिली सूचना के आधार पर यह जानकारी हुई कि 300 से अधिक फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर पुलिस थाने और कोर्ट को भेज दी गई जब कि असली मेडिकल रिपोर्ट को अस्पताल में ही दबाकर रख दिया गया। जेल से छूटने के बाद सुंदरलाल ने आरटीआई लगाया तब उन्हे पता चला कि उनके साथ कितना बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। सुंदरलाल को 2007 में जेल जाना पड़ा जिसके बाद उनका जीवन बर्बाद हो गया। सुंदरलाल ने बताया कि एक सामान्य मारपीट के मामले में फर्जी मेडिकल रिपोर्ट पर 308 लगा दी गई।

डॉक्टर ओपी सिंह और एक्स रे टेक्नीशियन राकेश प्रताप सिंह दोनों ने मिलकर जिला चिकित्सालय बहराइच में सैकड़ों कूट रचित जाली फर्जी एक्सरे रिपोर्ट तैयार कर संबंधित थाने को उपलब्ध करा दिया गया जिसको पुलिस ने सच मानकर एक्सरे रिपोर्ट के आधार पर गंभीर धाराओं में मुकदमा की बढ़ोतरी कर एक।दो नही बल्कि सैंकड़ो निर्दोषों को जेल भेज दिया। विचारणीय प्रश्न है की उन दिनों डॉ अरुण कुमार रेडियोलॉजिस्ट की एकमात्र एक्सरे विभाग में तैनाती थी उन्हीं को पुलिस मेडिकोलीगल में आने वाले मजदूरों का एक्सरे रिपोर्ट लिखने का विधिक अधिकार प्राप्त था बावजूद इसके x-ray टेक्निशियन राकेश प्रताप सिंह ने मजरुबो से सांठगांठ कर उनकी दूसरी क्रॉस कूट रचित झूठी जाली एक्स-रे रिपोर्ट डॉक्टर ओपी सिंह से तैयार कराया जबकि डॉ ओ पी सी की तैनाती एक्सरे विभाग में नहीं थी बावजूद इसके उन्होंने फर्जी एक्स-रे रिपोर्ट तैयार किया।

इस मामले में सबसे बड़ा अपराध राकेश प्रताप सिंह एक्सरे टेक्नीशियन का है की विभाग का चार्ज उनके पास था एक्सरे रिपोर्ट बुक और एक्सरे प्लेट उन्हीं के पास रहती थी। यह जानते हुए भी की मजदूरों के घायलों की एक्सरे रिपोर्ट अरुण कुमार द्वारा बनाई जा चुकी है। फिर भी एक्स-रे क्रमांक उसी दिनांक को दूसरे एक्सरे रिपोर्ट बुक पर जिसे उन्हीं द्वारा बनाया गया था तैयार करा कर थाने भेज दिया जबकि डॉ अरुण कुमार द्वारा तैयार की गई असली रिपोर्ट नहीं भेजी गई इसका खुलासा आईटीआई में सीएमएस द्वारा भेजे गई एक्सरे क्रश रिपोर्ट व विभागीय जांच आख्या से साबित हुआ।

सबसे बड़ा यह मुद्दा यह है की इस झूठी कूट रचित फ्रॉड एक्सरे रिपोर्ट के आधार पर अदालत भी मुकदमों का परीक्षण किया और कर रही है। इन्हीं फर्जी एक्सरे रिपोर्टों के आधार पर निर्दोषों को अदालत से सजा भी हुई होगी साथ ही अदालत को गुमराह किया गया, इतने सुबूत उपलब्ध होने के बावजूद भी राकेश प्रताप सिंह को ना तो विभाग द्वारा निलंबित किया गया ना ही इन्हें बर्खास्त किया गया। इस पूरे मामले की जांच अब बस्ती जनपद में तैनात क्राइम ब्रांच के दरोगा राजकुमार पांडे कर रहे है। जिसका पर्यवेक्षण एएसपी दीपेंद्र चौधरी द्वारा किया जा रहा है। एएसपी दीपेंद्र ने इस मामले को लेकर कहा कि पुलिस कार्यवाही कर रही है, जल्द ही दोनो आरोपी की गिरफ्तारी की जाएगी। कहा कि हाई कोर्ट ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और दो माह में कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया है।

बाइट : सुंदर लाल, पीड़ित

बाइट : दीपेंद्र चौधरी.ए.एस.पी

रिर्पोट : के.के. गुप्ता (संवाददाता)बहराइच

बस्ती यूपी

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