स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी को ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी, देहरादून के दीक्षांत समारोह में सहभाग हेतु विशेष आमंत्रण

ऋषिकेश, 10 अक्टूबर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी, देहरादून, 10 वां दीक्षांत समारोह में विशेष अतिथि के रूप में सहभाग किया। इस अवसर पर प्रोफेसर अनिल सहस्रबुद्धे अध्यक्ष, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, डा जगदम्बा प्रसाद चन्द्रा जी, श्री रूपिंदर पाल सिंह एक सेवानिवृत्त पेशेवर फील्ड हॉकी खिलाड़ी ने सहभाग किया। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी की ओर से स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी को ’’डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी’’ से सम्मानित किया गया। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों को सम्बोधित करते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि युवाओं के पास तीन हथियारों का होना नितांत आवश्यक है, ‘शान्ति, धैर्य और आत्मविश्वास’। आज के युवा जागरूक होकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये मेहनत करते हैं परन्तु इस यात्रा में उनके पास शान्ति, धैर्य और आत्मविश्वास का होना बहुत जरूरी है। आप जब भी कोई कार्य करें उस समय अपनी दृष्टि केवल उसके बाहय परिणामों पर ही न रखंे बल्कि उसका परिणाम आपके अपने जीवन पर क्या हो रहा है यह सोचना भी बहुत जरूरी है। 

आप जो भी करें मन से करें और जीवन को बिना तनाव के अच्छी तरह से जियें तथा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशाओं में लगायें। अपनी आकांक्षा और लक्ष्यों को साकार करने के लिए संघर्ष करें, अपने जीवन के लिए एक रणनीति बनाये और संतुष्टि के साथ आगे बढ़ते रहें। साथ ही जीवन में आने वाले सुखद पलों का स्वाद अवश्य लें परन्तु जो संकट का समय होता है उसे भी स्वीकार कर धैर्य के साथ उसके बीतने का इंतजार भी करें यही तो जीवन है।

स्वामी जी ने आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर कहा कि जीवन अपने आप में बहुत कीमती है इसलिये उसे कृत्रिम जरूरतों और अनावश्यक चीजों के पीछे भागकर बर्बाद न करें। शराब, नशीली दवाओं, ड्रग्स और तनाव को अपने जीवन पर राज करने की अनुमति न दें क्योंकि ये सब आपको आगे बढ़ने में मदद नहीं करते बल्कि ये जीवन को नष्ट कर देते हैं इसलिए इस समय अपने आप को देखें, अपने सपनों को पहचानें और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहें। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डा राकेश शर्मा जी ने कहा कि राष्ट्र के अद्वितीय गौरव और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने हेतु हम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को ’’डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी’’ प्रदान कर सौभाग्य महसूस कर रहे हैं। आपकी उपस्थिति हमेशा से ही युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है। आपके संदेश से युवाओं को अपना करियर शुरू करने और जीवन की नई चुनौतियों को स्वीकार करने में मदद मिलेगी।छात्रों को डिग्री और मेडल देते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि मेडल के साथ ही अपने राष्ट्र को माॅडल बनाने हेतु आगे आयें।

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