सभी भारतीय वृक्षारोपण को राष्ट्रीय धर्म बनाएं..ज्योति बाबा

कानपुर, 22 मई शहरीकरण बढ़ रहा है और जैव विविधता सिमट रही है जीवन शैली भी बदल रही हैं यह बदलाव रक्षा प्रणाली को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं स्वच्छता के महत्व को कम करके आंका नहीं जा सकता है लेकिन अत्याधिक सफाई और तेजी से होने वाले उपचार हमारे शरीर के अंदरूनी वातावरण को बदल देते हैं हमारा प्रतिरक्षा तंत्र सैकड़ों वर्षो से इन आंतरिक वातावरण के साथ-साथ विकसित हुआ है और इसे अचानक से बदलने से हमारा शरीर रोगों के प्रति कमजोर हो जाता है और उसके लिए प्रमुख जिम्मेदार वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण उत्पन्न वायु प्रदूषण है उपरोक्त बात सोसाइटी योग ज्योति इंडिया व उत्तर प्रदेश वैश्य व्यापारी महासभा के संयुक्त तत्वाधान में नशा हटाओ पेड़ लगाओ कोरोना भगाओ बेटी बचाओ अभियान के तहत विश्व जैव विविधता दिवस पर आयोजित ई-संगोष्ठी शीर्षक क्या कोरोना प्रसार में अंधाधुंध वनों की कटाई जिम्मेदार है पर अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्त अभियान के प्रमुख योग गुरु ज्योति बाबा ने कही।

बाबा श्री ने आगे बताया कि तथाकथित विकास के नाम पर उपजाऊ जमीनों पर कॉंक्रीट के जंगल खड़े करने के साथ वनों की अंधाधुंध कटाई की गई परिणाम स्वरूप जलवायु और भू प्रदूषण चरम पर पहुंच गया और खाद्य पदार्थों में प्रदूषण का खास प्रभाव दिखाई देने लग गया,इसीलिए बच्चे बुजुर्ग और जवान गंभीर बीमारियों का शिकार बन गए,सबसे बड़ा तोहफा विकास के नाम पर हर बच्चे को मोबाइल मेनिया का रोगी बनाकर शारीरिक गतिविधियों को लगभग न्यून कर दिया जिसके कारण दिल,दमा,डायबिटीज,हाइपरटेंशन,कैंसर जैसी ना जाने कितने रोगों का तोहफा स्वयं प्राप्त कर लिया।

ज्योति बाबा ने जोर देकर अनुरोध किया कि इस बार प्रदेश सरकार के मुखिया जब वृहद स्तर पर वृक्षारोपण का अभियान चलाएं तो उससे पहले पूरे प्रदेश की जनता को पेड़ लगाने हेतु विभिन्न प्रचार प्रसार माध्यमों व पुरस्कार श्रंखला प्रोत्साहन के द्वारा आंदोलित कर दें,जिससे पेड़ लगाने के बाद उनकी रक्षा के लिए लाखों हाथ तैयार हो सके,क्योंकि कोरोना जैसे अन्य वायरस व वायु प्रदूषण से मुक्त होने के लिए वृक्षारोपण को राष्ट्रीय धर्म बनाना ही होगा।

डॉ रविंद्र नाथ चौरसिया निवर्तमान अध्यक्ष आईएमए ने कहा कि हमने प्रकृति के साथ जो क्रूरता की है वही तो हमसे कोरोना महामारी के रूप में जनजीवन हानि पहुंचाकर वापस लौटा रही है राष्ट्रीय संरक्षक डॉ आर पी भसीन ने कहा की औद्योगिकीकरण के चलते हमने कई गुना जहरीले तत्वों को पर्यावरण में छोड़ा,जिसने स्थानीय स्तर पर नदी प्रदूषण से लेकर जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक संकट तक के नकारात्मक प्रभावों को पैदा किया।रविशंकर हवेलकर सदस्य प्रदेश सलाहकार शासन समिति ने कहा कि आज बीमारियों,सामाजिक और आर्थिक असमानता,अपराध और मनोवैज्ञानिक समस्याओं के वेश में विकास हमारे हिस्से में वापस लौट आया है।संगोष्ठी का संचालन प्रदेश महामंत्री गणेश गुप्ता व धन्यवाद प्रदेश अध्यक्ष सत्यप्रकाश गुलहरे ने दिया।अन्य प्रमुख अनूप अग्रवाल प्रदेश महामंत्री संगठन,देवेंद्र गुप्ता,काशीराम सागर बृजलाल भारती,मोहम्मद तंजीम,सलीम कुरेशी,विमल माधव गीता पाल,रोहित कुमार इत्यादि थे।

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