पर्यावरण और प्रकृति की सुंदरता के लिए आओ गौरैया बचाएं..सविता मौर्या,ब्लाक प्रमुख ऊंचाहार रायबरेली

लखनऊ, 14 अक्टूबर वैष्णवी (रतन ज्योति) आज के समय में गांव में पक्के मकान का निर्माण तेजी से हुआ है और गांव के किसानों द्वारा कृषि में रासायनिक खाद एवं जहरीले कीटनाशक का उपयोग पहले की अपेक्षा ज्यादा हो रहा है और जहां पहले औरतें अपने घर आंगन में सूखने के लिए अनाज डालती थी तब गौरैया अपने आप आ जाती थी और तेजी से बदलते समय के चलते अब गौरैया समेत तमाम पक्षी विलुप्त के कगार पर हैं अगर हम अपने आसपास सदियों से रह रहे जीव जंतुओं के लिए स्वस्थ पर्यावरण नहीं तैयार कर पाते हैं तो उनके लिए हम लगातार कब्रगाह बनाते जा रहे हैं हमें अपने पर्यावरण प्रकृति की सुंदरता को बचाना है तो सुंदरता में चार चांद लगाने वाले पक्षियों खासतौर से गौरैया के बचाव के बारे में आज से नहीं अभी से चिंतन के साथ अपने बच्चों का सहयोग प्राप्त करते हुए काम शुरू करना होगा,कभी खुले आंगन में फूदकने वाली गौरैया घर बाहर तक बिखरे पड़े अनाज को चुगने वाली गौरैया अब एक सीमित संख्या में सुबह सवेरे ही दिखाई पड़ जाती है शहरों में तो दिखना बड़ा मुश्किल सा होता है।

एक समय ऐसा था बचपन में जब बारिश के बाद मौसम साफ होता था तो दो दो सौ चार चार सौ के झुंड में एकाएक दरवाजे पर गौरैया आकर गांवों में दस्तक दे देती थी और जरा सी आहट पाकर फुर हो जाने वाली गौरैया अब पहले की अपेक्षा नजर नहीं आती है इसमें कहीं ना कहीं बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण शहरीकरण और हमारी आधुनिक लाइफस्टाइल प्रमुख कारण है और शहर तो शहर अब गांव में भी बहुत कुछ चेंज हो चुका है गांव के घर आंगन में दिखने वाली गौरैया अब विलुप्त की कगार पर है सरकार ने गौरैया को संरक्षण देने के लिए जगह-जगह घोसले लगवाए पर आज भी घोसले गौरैया की बांट जोहते जोहते टूट गए हैं क्योंकि हमने पेड़ों को काट डाला हमने प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया। क्योंकि पक्षी पेड़ों के पास रहते हैं,पेड़ों से भोजन प्राप्त करते हैं और पक्षियों के कारण पेड़ भी जिंदा रहते हैं कितना अच्छा लगता था।

जब गांव में दादी नानी की कहानी सुनने में कभी गौरैया की कहानी भी आती थी पर शायद यह पता ना था कि हम अपने ही प्रकृति दोहन और विकास के नाम पर इतना आगे बढ़ जाएंगे कि हम अपने जीव जंतुओं और पक्षियों के लिए स्थान सुरक्षित नहीं रख पाएंगे गौरैया के लिए अब शायद ही गांव में कच्चे मकान हो,पहले गांव के कच्चे मकानों की छतों पर लकड़ी के पेड़ के नीचे छप्परओं में अपना घोंसला बनाने वाली गौरैया अब गिनती की संख्या में नजर आती है आओ हम सब मिलकर इस बार नवमी मे देवी दुर्गा से यह स्तुति कर वरदान मांगे कि हे मां तू हमारी आने वाली भावी पीढ़ियों के लिए प्रकृति का संरक्षण कर और जो लोग प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं उन्हें सद्बुद्धि प्रदान करें ताकि हम इस धरती को जीव जंतुओं समेत सभी के लिए स्वस्थ वातावरण में जीने का परिवेश तैयार कर सकें और इसीलिए भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के ग्रीन डेवलपमेंट कांसेप्ट बोले तो प्रकृति के साथ विकास पर हम सब लोगों को आगे बढ़ना होगा।

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