जीएसटी से कारोबार करना आसान होगा, बढ़ेगा व्यापार: जेटली

वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली में कर की दर 18 फीसदी से ऊपर ही रहने की संभावना है। इसका संकेत बृहस्पतिवार को केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने खुद दिया। जीएसटी पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान जेटली ने कहा कि जीएसटी की दर 18 फीसदी रखने की बात मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) से चिपकायी गई है जबकि उन्होंने इसे 16.9 से 18.9 फीसदी के बीच रखने का सुझाव दिया था।

उन्होंने बताया कि केन्द्र का 85 फीसदी कर राजस्व केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के 12.5 फीसदी के स्टेंडर्ड रेट पर आता है। उसी तरह राज्यों के 62 वैट राजस्व का स्टेंडर्ड रेट 14.5 फीसदी है। मतलब यह कि अधिकतर वस्तुओं पर अप्रत्यक्ष कर की दर 27 फीसदी बैठती है।

ऐसे में जीएसटी के तहत कर की दर तो कम होगी, पर रेवेन्यू न्यूट्रेलिटी का भी ध्यान रखना होगा। रेवेन्यू न्यूट्रेलिटी का मतलब राज्य या केन्द्र सरकार में किसी का नुकसान नहीं हो। उनका कहना है कि यदि जीएसटी दर में काफी कमी की गई तो राज्यों को पांच साल तक राजस्व में कमी की भरपाई केन्द्र को करनी होगी।

जीएसटी रेट कम रहने से केन्द्र के पास भी पर्याप्त निधि नहीं रहेगी। जब केन्द्र के पास पर्याप्त निधि नहीं रहेगी, तो भी उसे राज्यों को तो भरपाई करनी ही होगी। ऐसे हालात में तो घाटा ही बढ़ेगा। राज्यों की क्षतिपूर्ति की वजह से राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी से संबंधित एक सवाल पर उन्होंने कहा कि यह नहीं बढ़े, इसके लिए राजस्व और व्यय में संतुलन बनाना भी केन्द्र का ही काम है।

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